Gandhi: A Hope in Despair

by Dr. A. Raghu Kumar
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Product Description

About the book

Raghu Kumar puts Gandhi in a multi-dimensional, philosophical and global perspective which will make an interesting reading. It is a valuable reading for anyone who wants to study Gandhi honestly.

– Shri Prasad Gollanapalli (Managing Trustee, Gandhi King Foundation Secretary, Gandhi Darshan)

Dr. Raghu Kumar, in the book titled ‘Gandhi a hope in despair’ perhaps succeeded in seducing the reader into the act of opening the book. His unassuming declaration that “This work is to convey to the readers, the essentials of my reading of Gandhi and the things I found in Gandhi as very precious to my mind. At the end of 150 years, I found Gandhi more readable than he was during the freedom struggle – thanks to his critics!” is perhaps a testimony to his honest intentions. This is a book that should adorn at least every library and every Center promoting literature on Gandhi to start with!

– Prof. P. Vishnu Dev (Head, Dept. of Sociology & Social Work, Osmania University; Director on Board, NLCIL, Ministry of Coal, Govt. of India)

About the author

Dr. Raghu Kumar hails from rural background of the backward region Rayalaseema in the erstwhile combined State of Andhra Pradesh. He is a Doctorate in Law and practices law for a living. He is associated with various activities in education of Trade Unions and working class members on labour laws through various organizations. He is also the Director, Centre for Critical Juridical Studies, Hyderabad. He interacted with various organizations including National Service Scheme (NSS) Telangana State and lectured extensively on Gandhiji’s philosophy in many Telangana Schools and Colleges.

Note

This book is on pre-order and the shipping will start when the book released on 2nd October, 2020

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Aatank ke rang- Kale ya hare

by Pushkar Vihari

बचपन से ही मुझे फिल्मों में काफी दिलचस्पी रही है। एक दिन यूंही एक फिल्म देखते देखते मेरे मन में ये ख्याल आ गया कि आखिर हर फिल्म में आतंकवादी का किरदार हमेशा मुसलमानों से ही क्यूं ताल्लुक रखता है। और फिर मैं निकल पड़ा अपने इस मन के ख्याल की खोज में। अपने इस सफ़र में मैं रूबरू हुआ इस्लामिक आतंकवाद से, शांति के संदेश देने वाले धर्म के आतंकवाद के ताल्लुकात से, लोगों के मन में घोले जा रहे ज़हर से, अपने फायदे के लिए दुनिया को मुसलमान और गैर मुसलमान में बांटने वाली मानसिकता से, आतंकवाद के खौफनाक चेहरे से और आतंकवाद के मुखौटे के पिछे छिपे उस मासुम चेहरे से भी। खैर, सच की तालाश में निकलना बेहद आसान है, उसके साथ साहस करके चंद कदम चलना भी आसान है। हां, मगर उसी सच की तह तक पहुंच कर उसे विश्व पटल पर उजागर करना बेहद ही मुश्किल है। और इस किताब के माध्यम से मेरा उद्देश्य भी यही है की सच को सच बताना। आतंकवाद के असल चेहरे से आपको रूबरू कराना। इश्वर ने हमें इंसान बना कर भेजा है सिपाही नहीं, आइए जिंदगी जीते हैं।

– पुष्कर विहारी

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Madhya Pradesh ki Mahila Kathakar

by Dr. Pragya Anuragi

मध्यप्रदेश की महिला लेखिकाओं ने कथा-साहित्य में अपना विशिष्ट योगदान दिया है । म.प्र. की ही आधुनिक कथा लेखिका उषा मित्रा सुभद्रा कुमारी चौहान का नाम विशेष रूप से लिया जाता है । इन लेखिकाओं ने भारतीय समाज की स्थिति का यथार्थ वर्णन करते हुए नारी जीवन की समस्याओं पर भी अपनी कहानी की कथावस्तु ली । प्रदेश की महिला कथा लेखिकाओं में हिन्दी कथा लेखन में ख्याति अजित की है इन लेखिकाओं में मालती जोशी, मन्नू भंडारी, मेहरून्निशा, परवेज, उर्मिला शिरीष, चित्रा चतुर्वेदी, मृणाल पाण्डेय, कृष्णा, अग्निहोत्री तनूजा चौधरी का नाम उल्लेखनीय है । इन लेखिकाओं ने अपने कथा-साहित्य के माध्यम से एक ओर समाज और व्यक्ति को आन्तरिक संवेदनाओं को व्यक्त किया है वही बदलते जीवन मूल्य का चित्रण भी किया है । मध्यप्रदेश की प्रमुख महिला लेखिका है-सुभद्रा कुमारी चौहान, उषा देवी मित्रा, मालती जोशी, मेहरून्निशा परवेज, कृष्णा अग्निहोत्री, मन्नू भंडारी, मृणाल पाण्डेय, उर्मिला शिरीष, चित्रा चतुर्वेदी, उर्मिकृष्ण, ललिता रावल, शशि नायक, सुषमा मुनीन्द्र, राजकुमारी रश्मि, रोमा चटर्जी, निकहत शाजापुरी, छाया श्रीवास्तव, उषा जायसवाल, विधावती, मालविका, ज्योत्सना मिलन, तनूजा चौधरी, संध्या जैन ‘श्रुति‘, कौसर जहां कौसर इन लेखिकाओं ने कथा-साहित्य को पूर्णतः समृद्व किया है ।

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The Guts of G.U.S.T.

by Sakina Ramgarh

Holding on to older-life lessons is of no use to Dev and Khushi who are all set to enter a whole new world out of their orphanage. The never ending turbulence turns their life upside down. Now will they seek answers or simply give in? And most importantly, what if the dark societal spell finally traps them? This book is a fun and fictional take on reforming societal norms and giving life its true value that we don’t even realize we have lost.

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