Jhoole Ja Raha Hun

किसी मेले के सबसे बड़े झूले में बैठ कर गोल-गोल घूमना निश्चित रूप से एक रोमांचक अनुभव होता है। जीवन में भी हम इसी प्रकार कुछ चीजों के इर्द-गिर्द घूमते हुए तमाम अनुभवों से गुजरते रहते हैं। यह पुस्तक मानव-जीवन की उस रचनात्मकता को समर्पित है जो हर प्रकार के उतार-चढ़ाव के बीच निरंतर नई भावनाऐं तलाश लेती है। अलग-अलग प्रेरणाएँ लेकर हम सब जीवन के झूले को झूले जा रहे हैं। यह पुस्तक जीवन के बारे में है। और हर उस भावना के बारे में भी जो जीवन के अनुभवों के साथ आती है और हमें छूकर चली जाती है।